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Hasanpur PHC News: हसनपुर PHC में 3 MBBS डॉक्टरों के रहते डेंटिस्ट को चिकित्सा पदाधिकारी बनाने पर उठे सवाल, स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर चर्चा

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Alam Ki Khabar: समस्तीपुर के हसनपुर PHC में तीन MBBS डॉक्टरों की मौजूदगी के बावजूद डेंटिस्ट को चिकित्सा पदाधिकारी बनाए जाने को लेकर सवाल उठ रहे हैं। पूरे प्रखंड में इस फैसले की चर्चा है, जबकि सिविल सर्जन इस मामले में कुछ भी बोलने से परहेज कर रहे हैं। पढ़ें पूरी रिपोर्ट।

समस्तीपुर, 13 जुलाई। आलम की खबर:समस्तीपुर जिले के हसनपुर प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र (PHC) में चिकित्सा पदाधिकारी (MOIC) के पद पर एक डेंटिस्ट चिकित्सक को जिम्मेदारी सौंपे जाने के बाद स्वास्थ्य विभाग की कार्यशैली पर सवाल उठने लगे हैं। प्रखंड भर में इस निर्णय की चर्चा हो रही है। स्थानीय लोगों के साथ-साथ स्वास्थ्य विभाग से जुड़े लोगों के बीच भी यह सवाल उठाया जा रहा है कि जब स्वास्थ्य केंद्र में पहले से तीन MBBS चिकित्सक कार्यरत हैं, तब डेंटिस्ट चिकित्सक को चिकित्सा पदाधिकारी बनाने की आवश्यकता क्यों पड़ी।

चर्चा यह भी है कि इस निर्णय से लंबे समय से सेवा दे रहे MBBS चिकित्सकों के सम्मान और वरिष्ठता की अनदेखी हुई है। लोगों का कहना है कि यदि तीन योग्य MBBS चिकित्सक उपलब्ध थे तो प्रशासनिक जिम्मेदारी उन्हीं में से किसी एक को सौंपी जानी चाहिए थी। यही कारण है कि यह मामला अब पूरे हसनपुर प्रखंड में चर्चा का विषय बना हुआ है।

सूत्रों के अनुसार इस फैसले को लेकर स्वास्थ्य विभाग के भीतर भी तरह-तरह की चर्चाएं चल रही हैं। कई लोग इसे सामान्य प्रशासनिक निर्णय मान रहे हैं, जबकि कई लोग इसे नियमों और परंपरा के विरुद्ध बता रहे हैं। हालांकि इस संबंध में अब तक स्वास्थ्य विभाग की ओर से कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण जारी नहीं किया गया है।

इस पूरे मामले में जब समस्तीपुर के सिविल सर्जन से उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया तो उन्होंने किसी भी प्रकार की टिप्पणी करने से परहेज किया। उनकी चुप्पी के कारण लोगों के बीच और भी अधिक सवाल उठने लगे हैं। अब सभी की नजर स्वास्थ्य विभाग की आधिकारिक प्रतिक्रिया पर टिकी हुई है।

स्वास्थ्य प्रशासन से जुड़े जानकारों का कहना है कि यदि किसी विशेष परिस्थिति में डेंटिस्ट चिकित्सक को अतिरिक्त प्रभार दिया गया है तो विभाग को इसकी स्पष्ट जानकारी सार्वजनिक करनी चाहिए। वहीं यदि नियुक्ति नियमित प्रक्रिया के तहत की गई है तो उससे संबंधित आदेश भी सार्वजनिक होना चाहिए, ताकि किसी प्रकार की भ्रांति की स्थिति समाप्त हो सके।

फिलहाल हसनपुर PHC में चिकित्सा पदाधिकारी की नियुक्ति को लेकर शुरू हुई यह बहस अब स्वास्थ्य विभाग की कार्यप्रणाली और पारदर्शिता पर भी सवाल खड़े कर रही है। लोग यह जानना चाहते हैं कि आखिर इस फैसले का आधार क्या था और इसमें किस नियम का पालन किया गया।

नोट: इस समाचार में लगाए गए आरोप और स्थानीय स्तर पर हो रही चर्चाओं का उल्लेख किया गया है। स्वास्थ्य विभाग या संबंधित अधिकारियों की ओर से यदि कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण या आदेश जारी किया जाता है तो उसे भी प्रमुखता से प्रकाशित किया जाएगा।

क्या कहते हैं लोग?

स्थानीय लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग को इस मामले में स्पष्ट स्थिति सार्वजनिक करनी चाहिए, ताकि भ्रम की स्थिति समाप्त हो और लोगों का विश्वास बना रहे।

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पारदर्शिता ही विवाद खत्म कर सकती है

सरकारी संस्थानों में लिए गए हर प्रशासनिक निर्णय की विश्वसनीयता तभी बनी रहती है जब उसके पीछे के कारण स्पष्ट हों। यदि किसी नियुक्ति को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं तो स्वास्थ्य विभाग का दायित्व है कि वह तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करे। इससे कर्मचारियों का मनोबल भी बना रहेगा और आम लोगों का विश्वास भी मजबूत होगा।

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